तुलसी सिंह बिष्ट
सोचा था जय बच्चन ने जो कहा था कि मैं हिन्दी हूं और हिन्दी भाषा बोलूंगी तो इसमें बुरा क्या कहा परन्तु राज ठाकरे को क्या मुसीबत हो गई पता नहीं। उसके बाद अमिताभ बच्चन ने जो माफी मांगी उसे देखकर मुझे काफी हैरानगी हुई। हिन्दी राष्ट्र भाषा है और इसे बोलने पर किसी को माफी नहीं मांगनी चाहिए। लगता है दुनिया में पैसा ही महान है बाकी सब भाड़ में जाए। अगर शिव सेना के राज ठाकरे अमिताभ की फिल्म को नहीं चलने देते तो भी अमिताभ भूखा नहीं मारता। मैं संघी हूं। परन्तु हिन्दी भाषा को हीन भावना के तौर पर जो राज ठाकरे ने देखा वो गलत था। फिर अमिताभ को माफी मांगना दोनों ने ही देश की राष्ट्रभाषा के साथ खिलवाड़ किया है। आज से मेरे लिए गांधी जी के विचार मरे और तमाम हिन्दी लेखक मर गए अगर उन्होंने एक अभियान अमिताभ बच्चन और राज ठाकरे के विरुद्ध नहीं चलाया।
मैं राज ठाकरे की तरफ से नहीं बोल रहा हूं मैं केवल इतना आपको बताना चाहता हूं जैसे अत्याचार करने वाले के साथ-साथ अत्याचार सहन करने वाला भी दोषी होता है वैसे ही राष्ट्र भाषा बोलने के बाद माफी मांगा भी एक तरफ से देश की राष्ट्र भाषा का ही अपमान है। इसलिए आपसे विनती है कि भविष्य में राज ठाकरे और अमिताभ बच्चन से संबंधित सभी चीजों का बहिष्कार करें। दोनों ने ही किसी न किसी रूप से राष्ट्रभाषा का अपमान ही किया है। इसलिए ये लोग देश भक्त हो ही नहीं सकते।
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Thursday, September 11, 2008
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